निःशुल्क कानूनी सहायता क्या है ?

विधिक सेवाएँ प्राधिकरण अधिनियम,1987 के अंतर्गत सभी प्रकार के दीवानी और फौजदारी मुकदमों के लिए दी जाने वाली सलाह एवं सहायता निःशुल्क कानूनी सहायता कहलाती है।

क्या मैं भी कानूनी सलाह एवं सहायता प्राप्त कर सकता/सकती हूॅ ?

कानूनी सलाह सभी स्तर के व्यक्ति प्राप्त कर सकतें हैं और दिल्ली विधिक सेवाएँं प्राधिकरण अधिनियम 2002 के अध्याय 6 के नियम 9 के अनुसार योग्य व्यक्ति ही मुफ्त कानूनी सहायता सेवाएं प्राप्त कर सकतें हैं

कौन से व्यक्ति दिल्ली राज्य विधिक सेवाएँ प्राधिकरण से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने के अधिकारी हैं ?

दिल्ली विधिक सेवाएँ ं प्राधिकरण अधिनियम 2002 के अध्याय 6 के नियम 9 के अनुसार निम्नलिखित योग्य व्यक्ति ही मुफ्त कानूनी सहायता सेवाएँ प्राप्त कर सकतें हैं –
ए) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य।
बी) मानव व्यापार या बेगार का शिकार व्यक्ति।
सी)स्त्री या बालक।
डी)शारीरिक या मानसिक रुप से अस्वस्थ व्यक्ति।
ई) विनाशकारी प्राकृतिक आपदा, साम्प्रदायिक दंगे, जातीय अत्याचार, बाढ़, सूखा, भूकंप, या औद्योगिक संकट से प्रभावित व्यक्ति।
एफ) औद्योगिक कर्मी।
जी)जेल या संरक्षण गृह या नारी निकेतन या मनोचिकित्सालय में अभिरक्षित (कस्टडी) व्यक्ति।
एच) प्रत्येक व्यक्ति जिसकी वार्षिक आय 1,00,000 रू0 से कम है।
ए) किन्नर जिनकी वार्षिक आय 2,00,000 रू0 से कम है।
बी)वरिष्ठ नागरिक जिनकी वार्षिक आय 2,00,000 रू0 से कम है।

क्या कानूनी सेवाएँ वापिस ली जा सकती हैं ?

कानूनी सेवाएं निम्नलिखित स्थितियों में वापिस ली जा सकती हैं-
 जब सहायता प्राप्त व्यक्ति के पास पर्याप्त स्ांसाधन हो –
 जब सहायता प्राप्त व्यक्ति ने कानूनी सेवाएँ मिथ्या निरूपण अथवा कपट के द्वारा प्राप्त की हो।
 जब सहायता प्राप्त व्यक्ति विधिक सेवाएँ प्राधिकरण/समिति के साथ अथवा विधिक सेवाएँ अधिवक्ता के साथ सहयोग न कर रहा हो।
 जब व्यक्ति ने विधिक सेवाएं प्राधिकरण/समिति के द्वारा नियुक्त अधिवक्ता के अतिरिक्त अन्य विधि व्यवसायी को भी यह कार्य सौंपा हो।
 सहायता प्राप्त व्यक्ति की मृत्यु हो जाने की स्थिति में अपवाद स्वरूप दीवानी केस में जहां अधिकार और दायित्व बाकी हों।
 जहां कानूनी सहायता के लिए प्राप्त प्रार्थना पत्र में कानून का दुरूपयोग होना पाया जाए।

कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए दिए गए प्रार्थना-पत्र के मूल्यांकन की प्रक्रिया क्या है ?

जांच एवं मूल्यांकन समिति कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए दिए गए प्रार्थना-पत्र का मूल्यांकन करती है और नालसा (मुफ्त एवं सक्षम विधिक सेवाएँ) के अधिनियम 2010 के अधिनियम न. 7 के अंतर्गत यह भी निर्णय करती है कि क्या प्रार्थीं कानूनी सहायता प्राप्त करने के योग्य भी है या नहीं।

क्या कानूनी सेवाएँ न मिलने की स्थिति में अपील दायर की जा सकती है? यदि हाँ, तो अपील कहाँ दायर की जा सकती है ?

हॉ, कानूनी सेवाएँ न मिलने की स्थिति में अपील प्राधिकरण/समिति के अध्यक्ष अथवा राज्य विधिक सेवाएँ प्राधिकरण के माननीय कार्यकारी अध्यक्ष के समक्ष दायर की जा सकती है और अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा।

क्या प्राधिकरण से प्राप्त वकील से शिकायत होने पर उसकी शिकायत की जा सकती है ? यदि हाँ तो कहाँ ?

प्राधिकरण से प्राप्त वकील से शिकायत होने पर उसकी शिकायत संबंधित जिला विधिक सेवाएँ प्राधिकरण में की जा सकती है।

कोर्ट फीस, प्रोसेस फीस और टाइपिंग शुल्क की अदायगी किसके द्वारा की जाएगी ?

कोर्ट फीस, प्रोसेस फीस और टाइपिंग शुल्क की अदायगी प्राधिकरण के द्वारा की जाएगी। यह सारा व्यय सरकार के द्वारा किया जाता है।

क्या प्राधिकरण से प्राप्त वकील को मुझे फीस अदा करनी होगी ?

यदि आप मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने के अधिकारी हैं तो प्राधिकरण से प्राप्त वकील को आपको कोई फीस नहीं अदा करनी होगी।

क्या कानूनी सलाह टेलीफोन पर भी उपलब्ध है ?

हॉ, कानूनी सलाह (24×7) टोल फ्री हेल्पलाइन न. 1516 पर भी प्राप्त कर सकते हैं।

क्या इन प्राधिकरणों के अतिरिक्त किसी और स्थान से भी कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है ?

हॉ, इन प्राधिकरणों के अतिरिक्त 134 लीगल एड क्लीनिकों से भी कानूनी सहायता एवं सलाह प्राप्त की जा सकती है जिनका विवरण हमारी वेबसाइट www.dslsa.org पर उपलब्ध है।

मुफ्त कानूनी सलाह कहॉ से एवं कौन से व्यक्ति प्राप्त कर सकतें है ?

मुफ्त कानूनी सलाह उच्च न्यायालय विधिक सेवाएँ समिति एवं सभी जिला न्यायालय परिसरों में स्थित जिला विधिक सेवाएँ प्राधिकरण से अधिनियम के अनुरूप सभी व्यक्ति प्राप्त कर सकतें हैं।

क्या महिला चाहे वह आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न है, मुफ्त कानूनी सहायता की अधिकारी है ?

हॉ, महिला चाहे वह आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न है या नही, मुफ्त कानूनी सहायता की अधिकारी है।

मुफ्त कानूनी सहायता किस स्तर तक प्राप्त की जा सकती है ?

लंबित केस के किसी भी स्तर पर कानूनी सहायता प्रदान की जा सकती है। इसके अतिरिक्त मुफ्त कानूनी सहायता के लिए योग्य व्यक्तियों को मुकदमें से पूर्व भी कानूनी सहायता प्राप्त हो सकती है।

निरक्षर व्यक्ति के लिए कानूनी सहायता प्राप्त करने की क्या प्रक्रिया है ?

यदि प्रार्थी निरक्षर है या लिखने की स्थिति में नहीं है तो विधिक सेवाएं प्राधिकरण/समिति का सचिव अथवा अन्य कोई अधिकारी उसके मौखिक बयान को रिकार्ड करेगा और उस रिकार्ड पर उसके अंगूठे का निशान/हस्ताक्षर लेगा और उस रिकार्ड को उसके प्रार्थना-पत्र के समान ही समझा जाएगा।

क्या किन्नर भी मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने के अधिकारी है ?

हाँ, वे किन्नर जिनकी सालाना आय 2 लाख रू. से कम हैं, मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने के अधिकारी है।

क्या विधिक सेवा अधिवक्ताओं की सेवाएँ अन्य अधिकरणों में भी प्राप्त हो सकती हैं?

हॉ, दिल्ली राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण के अधिवक्ताओं की विधिक सेवाएँ निम्नलिखित फोरम/अधिकरणों में भी प्राप्त होती हैं-
 केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण
 सैन्य बल अधिकरण
 राष्ट्रीय उपभोक्ता शिकायत निवारण अधिकरण
 राज्य उपभोक्ता शिकायत निवारण अधिकरण
 ऋण वसूली अधिकरण
 दिल्ली स्कूल अधिकरण
 राष्ट्रीय हरित अधिकरण
 कंपनी लॉ बोर्ड
 छावनी बोर्ड
 इनकम टैक्स अपीली अधिकरण

दिल्ली राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण से संबंधित सूचना कहॉ से प्राप्त कर सकतें है?

दिल्ली राज्य विधिक सेवाएँ प्राधिकरण से संबंधित सूचना हमारी वेबसाइट www.dslsa.org से प्राप्त कर सकते हैं।

क्या जेल में बंद कैदियों को भी कानूनी सहायता प्रदान की जाती है ?

हॉ, जेल में बंद कैदियों को कानूनी सहायता जेल में स्थित लीगल सर्विसिज क्लीनिक में कानूनी सहायता अधिवक्ता के माध्यम से प्रदान की जाती है।

क्या न्यायालय के समक्ष पहली बार प्रस्तुत होने वाले कैदी को कानूनी सहायता प्रदान की जाती है ?

हाँ, न्यायालय के समक्ष पहली बार प्रस्तुत होने वाले कैदी की ओर से कोई वकील न होने की स्थिति में न्यायालय के द्वारा प्राधिकरण की ओर से उस न्यायालय में नियुक्त रिमांड एडवोकेट प्रतिदिन (जिसमें छुट्टी के दिन भी सम्मिलित हैं), प्रदान किया जाता है।

क्या बच्चों और किशोरों के लिए प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता नियुक्त किए जाते हैं?

हाँ, सभी बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्ड एवं ऑल इंडिया लीगल एड सेल ऑन चाइल्ड राइटस में भी प्राधिकरण की ओर से अधिवक्ता नियुक्त किए गए है।