नई दिल्ली, 16 सितम्बर 2025: दूरदर्शन उर्दू पर प्रसारित विशेष कार्यक्रम “अपना मुल्क आइन” में श्री राजीव बंसल, विधिवत् सदस्य सचिव, दिल्ली राज्य विधिक सेवाएँ प्राधिकरण (डीएसएलएसए), नई दिल्ली तथा अधिवक्ता सुश्री मिशिका ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में “महिला घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005 (डीवी अधिनियम)” के प्रावधानों तथा दिल्ली राज्य विधिक सेवाएँ प्राधिकरण (डीएसएलएसए) के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता सेवाओं के लाभों पर चर्चा की गई।

चर्चा के दौरान, श्री राजीव बंसल, सदस्य सचिव, डीएसएलएसए ने स्पष्ट किया कि घरेलू हिंसा केवल शारीरिक उत्पीड़न तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक, आर्थिक और यौन शोषण भी सम्मिलित है। भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के विपरीत, जहाँ महिलाओं को प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु पुलिस पर निर्भर रहना पड़ता है, वहीं डीवी अधिनियम की धारा 12 के अंतर्गत महिलाएँ सीधे मजिस्ट्रेट न्यायालय से राहत के लिए संपर्क कर सकती हैं। इस अधिनियम में अंतरिम राहत, भरण-पोषण, निवास आदेश और अभिरक्षा (कस्टडी) के अधिकार सम्मिलित हैं। आर्थिक सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी वयस्क पुरुष परिजनों, जैसे पति, ससुर अथवा पुत्रों पर आ सकती है, जबकि 18 वर्ष से कम आयु के अपराधियों पर भी कार्यवाही की जा सकती है। अधिनियम बुज़ुर्ग महिलाओं को भी सुरक्षा प्रदान करता है, जिनका उत्पीड़न बहुओं या अन्य परिजनों द्वारा किया जाता है। इसी प्रकार, वे महिलाएँ भी संरक्षित हैं जिन्हें घर से बेदखल किए जाने का डर है; न्यायालय उन्हें साझा गृह में रहने की अनुमति दे सकता है या उत्तरदाता को वैकल्पिक आवास अथवा क्षतिपूर्ति प्रदान करने का निर्देश दे सकता है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि धारा 31 के अंतर्गत न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करने पर कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम एक वर्ष तक का कारावास और/या ₹20,000 तक का जुर्माना हो सकता है। अधिनियम का उद्देश्य यह है कि मामलों का निस्तारण 60 दिनों के भीतर हो जाए, यद्यपि कभी-कभी विलंब भी संभव है। जिन महिलाओं के पास जीविका चलाने के साधन नहीं हैं, उन्हें अंतरिम राहत प्रदान की जा सकती है। कार्यवाही मजिस्ट्रेट न्यायालय से प्रारंभ होती है, जिसकी अपील उच्च न्यायालय और अंततः सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकती है। श्री राजीव बंसल ने धारा 12 के अंतर्गत वाद दायर करने की प्रक्रिया भी समझाई—महिला अपने निवास स्थान पर, उत्तरदाता के निवास स्थान पर अथवा जहाँ कारण उत्पन्न हुआ हो, उस क्षेत्राधिकार की अदालत में शिकायत दर्ज करा सकती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दिल्ली के सभी जिला न्यायालयों में डीएसएलएसए के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता सेवाएँ उपलब्ध हैं, ताकि महिलाओं को बिना किसी खर्च के विधिक प्रतिनिधित्व प्राप्त हो सके।

कार्यक्रम में यह तथ्य भी रेखांकित किया गया कि बच्चों की अभिरक्षा (कस्टडी) डीवी अधिनियम का एक महत्वपूर्ण पहलू है। न्यायालय परिस्थितियों के अनुसार अभिरक्षा माँ अथवा पिता में से किसी के पक्ष में प्रदान करता है और साथ ही गैर-अभिभावक माता-पिता के लिए भेंट/मुलाक़ात (साप्ताहिक, मासिक अथवा पखवाड़ा वार) के अधिकार भी निर्धारित करता है।